उद्देश्य

प्रस्तावना इस प्रस्ताव के माध्यम से मध्यप्रदेश की जीवनदायिनी नदी नर्मदा के संरक्षण को जन आन्दोलन बनाने के लिए प्रदेश शासन द्वारा अभिकल्पित एवं समन्वित "नमामि देवि नर्मदे - एक यात्रा" की अवधारणा, रूपरेखा तथा रचना को स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है।

सारांश

'नमामि देवि नर्मदे' यात्रा का संचालन 148 दिनों में 50 सदस्यों के कोर ग्रुप द्वारा नर्मदा नदी के उद्गम स्थल अमरकंटक से सोंडवा(प्रदेश में नर्मदा प्रवाह का अंतिम स्थल) से पुन: अमरकंटक तक की यात्रा के रूप में किया जायेगा। यात्रा के दौरान नर्मदा तटीय क्षेत्र में चिन्हांकित स्थानों पर संगोष्ठियों, चौपालों एवं अन्यग विविध गतविधियों का आयोजन किया जायेगा, जिसके माध्यम से जन समुदाय को नर्मदा नदी के संरक्षण की आवश्यकता एवं वानस्पतिक आच्छादन, स्वच्छता एवं साफ-सफाई, मृदा एवं जल संरक्षण तथा प्रदूषण की रोकथाम के माध्यम से नर्मदा नदी के संरक्षण के संबंध में जागरूक किया जायेगा।

नर्मदा नदी देश की सबसे प्राचीनतम नदियों में से है, जो कि मध्यप्रदेश में बहने वाली एक मुख्य नदी है। नर्मदा नदी को मध्यप्रदेश की जीवन-रेखा भी कहा जाता है। नर्मदा नदी अनूपपुर जिले के अमरकंटक की पहाडि़यों से निकलकर छत्तीसगढ, मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात से होकर करीब 1310 किलोमीटर का प्रवाह पथ तय कर भरूच के आगे खंभात की खाडी में विलीन हो जाती है। मध्य प्रदेश में नर्मदा का प्रवाह क्षेत्र अमरकंटक(जिला अनूपपुर) से सोंडवा(जिला अलीराजपुर) तक 1077 किलोमीटर है, जो कि इसकी कुल लम्बाई का 82.24 प्रतिशत है। नर्मदा अपनी सहायक नदियों सहित प्रदेश के बहुत बड़े क्षेत्र के लिए सिंचाई एवं पेयजल का बारहमासी स्रोत है। नर्मदा नदी का कृषि, पर्यटन, तथा उद्योगों के विकास में महत्वपूर्ण योगदान है, इसके तटीय क्षेत्रों में उगाई जाने वाली मुख्य फसलें धान, गन्ना, दाल, तिलहन, आलू, गेहूँ एवं कपास हैं जो प्रदेश की खाद्यान्न व्यवस्था का महत्वपूर्ण स्रोत हैं। इसके तट पर ऐतिहासिक व धार्मिक दृष्टि से महत्त्वपूर्ण पर्यटन स्थल हैं, जो प्रदेश की आय का महत्त्वपूर्ण स्रोत हैं। इस प्रकार नर्मदा नदी सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक, आर्थिक एवं धार्मिक दृष्टि से प्रदेश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

वर्तमान में नर्मदा नदी से संबंधित संसाधनों के अत्यधिक उपयोग के कारण नर्मदा नदी के संरक्षण हेतु प्रयास किया जाना अत्यंत आवश्यक है। नर्मदा नदी में प्रदूषण की रो‍कथाम, जल/नदी संरक्षण तथा नदी एवं उसके संसाधनों का समुचित उपयोग हो सके, इस हेतु जन समुदाय के सहयोग से सार्थक पहल किये जाने की आवश्यकता है। नर्मदा नदी के महत्व एवं संरक्षण की आवश्यकता को दृष्टिगत रखते हुए मध्यप्रदेश शासन द्वारा एक विशेष यात्रा के रूप में 'नमामि देवि नर्मदे' का संचालन किये जाने की योजना तैयार की गई है, जो कि मुख्य रूप से जन जागरूकता एवं जन समुदाय के सहयोग से नर्मदा नदी के तटीय क्षेत्रों में वानस्पतिक आच्छादन, स्वच्छता एवं साफ-सफाई, मृदा एवं जल संरक्षण तथा प्रदूषण की रोकथाम के माध्मय से नर्मदा नदी के संरक्षण हेतु कार्य किये जाने पर केन्द्रित है।

  • नर्मदा नदी के संरक्षण एवं नदी में उपलब्धए संसाधनों एवं समुचित उपयोग हेतु जन जागरण।
  • नर्मदा नदी के तटीय क्षेत्रों में वानस्पतिक आच्छादन बढ़ाने एवं मृदा क्षरण को रोकने हेतु वृहद स्तर पर पौधरोपण।
  • नदी की पारिस्थितिकीय में सुधार हेतु गतिविधियों का चिन्हांकन एवं उनके क्रियान्वयन में स्थानीय जन समुदाय की जिम्मेदारी तय करना।
  • टिकाऊ एवं पर्यावरण हितेषी कृषि पद्दतियो को अपनाने हेतु जन-जागरण।
  • नदी में प्रदूषण के विभिन्न कारकों की पहचान एवं उनकी रोकथाम हेतु उपाय व जन-जागरण।
  • नदी के जलभरण क्षेत्र में जल संग्रहण हेतु उपाय एवं जन-जागरूकता।

यात्रा के दौरान नर्मदा नदी के संरक्षण हेतु जन जागरूकता एवं आवश्यक कार्यवाही की जायेगी। यात्रा समाज को जागरूक एवं गतिशील करने में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभायेगी, जिससे यात्रा के अंतर्गत निर्धारित किये गये उद्देश्यों की पूर्ति की जा सकेगी। यात्रा के माध्यम से विभिन्न संस्थानों/व्यक्तियों को इस यात्रा से जुड़कर नर्मदा नदी के संरक्षण में सहयोग करने हेतु अवसर प्रदान किया जायेगा।

  1. अवधि: यात्रा का आयोजन दिनांक 11 दिसम्‍बर 2016 से 15 मई 2017 के मध्य किया जायेगा, जो कि अमरकंटक(जिला अनुपपुर) से प्रारंभ होकर नर्मदा नदी के दक्षिणी एवं उत्तरी दोनों तटों से होती हुई पुनः अमरकंटक में समाप्त होगी।
  2. कोर ग्रुप: यात्रा का नेतृत्व करने हेतु 50 विषय-विशेषज्ञों के एक कोर ग्रुप का गठन किया जावेगा, जिसमें नदी व जल संरक्षण, स्वच्छता, कृषि, जैविक कृषि, वन संरक्षण एवं पर्यावरण संरक्षण विषयों से संबंधित स्त्रोत व्यक्तियों को सम्मिलित किया जायेगा। कोर ग्रुप के अतिरिक्त आमजन भी स्वैच्छिकता के आधार पर यात्रा में किसी भी चिन्हित स्थान से सम्मिलित हो सकेंगे।
  3. यात्रा के साधन: यात्रा मुख्य रूप से पदयात्रा होगी, जिसके दौरान स्थानीय जन समुदाय के सहयोग से साइकिल यात्रा भी निकाली जायेगी।
  4. केन्द्रक बिन्दु: यात्रा मुख्य रूप से नर्मदा नदी के जल एवं मृदा संरक्षण के साथ-साथ स्वच्छता, प्रदूषण की रोकथाम, जैविक कृषि के प्रोत्साहन तथा तटीय क्षेत्रों के संरक्षण पर केन्द्रित रहेगी।
  5. यात्रा पथ: मध्य प्रदेश में नर्मदा नदी 16 जिलों तथा 51 विकासखण्डों से होती हुई 1077 किलोमीटर का मार्ग तय करती है। यात्रा के 148 दिनों के दौरान नर्मदा नदी के तट पर स्थित इन 16 जिलों/51 विकासखण्डों के लगभग 600 ग्रामों/स्थानों को सम्मिलित किया जाएगा। कोर ग्रुप/यात्रा दल द्वारा पूरी यात्रा के दौरान लगभग 3000 किलोमीटर की यात्रा की जायेगी।
  6. प्रचार-प्रसार: यात्रा के मार्ग (रूट) के अनुसार स्वैच्छिक संगठनों के माध्यम से समस्त चिन्हित स्थानों पर यात्रा के पूर्व यात्रा के संबंध में व्यापक प्रचार-प्रसार किया जायेगा। यात्रा में विषय विशेषज्ञों एवं जन समुदाय को सहभागी बनाने के लिए वेबसाइट पर उनके पंजीयन की व्यवस्था की गई है। इस यात्रा के प्रचार-प्रसार हेतु सोशल मीडिया का भी उपयोग किया जायेगा। कोर ग्रुप/यात्रा दल के सदस्यों तथा सहयोगी स्व्यंसेवकों हेतु पोशाक, एक प्रतीक चिन्ह तथा विषय आधारित गीत के माध्यम से इस यात्रा को विशेष बनाया जायेगा।
  7. ग्रामों में गतिविधियां: समस्त चिन्हित ग्रामों में ग्रामवासियों के सहयोग से ग्राम चौपालों/बैठकों का आयोजन किया जायेगा। कोर ग्रुप द्वारा ग्रामीणों को नर्मदा नदी के सामाजिक, साहित्यिक, सांस्कृतिक, आर्थिक एवं धार्मिक महत्व के विषय में जानकारी दी जायेगी। नर्मदा नदी में प्रदूषण के कारकों/स्त्रोतों तथा जीवन के विविध आयामों से सम्बंधित पर्यावरण संरक्षण की सतत चलने वाली विधियों पर भी चर्चा की जायेगी। ग्रामों में नर्मदा नदी के संरक्षण से संबंधित फिल्में/डाक्यूमेन्ट्री् का प्रदर्शन एवं अन्य प्रचार-प्रसार सामग्री का वितरण किया जायेगा। यात्रा के दौरान नर्मदा नदी के संरक्षण के संबंध में समस्याओं एवं ग्रामवासियों के सुझावों का संकलन किया जाएगा। ग्रामवासियों को नर्मदा नदी के संरक्षण के सम्बन्ध में जागरूक करने हेतु स्थानीय कलाकारों के सहयोग से सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये जायेंगे।
  8. अन्य गतिविधियां: कोर ग्रुप द्वारा प्रमुखता के साथ समुदाय के सहयोग से पौधरोपण, मृदा एवं जल संरक्षण, स्वच्छता, जैविक कृषि के प्रोत्साहन तथा प्रदूषण की रोकथाम से संबंधित सांकेतिक गतिविधियां भी संचालित की जायेगी। वर्तमान में कचरे के प्रबंधन हेतु प्रचलित विधियों को केन्द्र में रखते हुए नर्मदा नदी के प्रदूषण को कम करने हेतु उपायो पर बल दिया जायेगा। यात्रा के दौरान जन संवाद बैठकें, सम्मेलन, संगोष्ठी, वृक्षारोपण अभियान आदि भी चलाये जायेंगे।

  • व्यक्तियों तथा संस्थाओं/संस्थानों को यात्रा से जोड़ने के लिए वेबसाईट पर ऑनलाईन पंजीयन की सुविधा उपलब्ध है, जिसके माध्यम से वे किसी भी स्थान/दूरी के लिए यात्रा से जुड़ सकते हैं।
  • व्यक्ति सामूहिक रूप से की जाने वाली गतिविधियों, जिनका चिहांकन एवं समन्वीयन वेबसाईट के माध्यम से किया जायेगा, में सहयोग कर सकते हैं।
  • संस्था/संस्थान यात्रा के आयोजन-यात्रा की रूपरेखा तैयार करने तथा उसके संचालन में सहयोगी संस्था/संस्थान के रूप में जुड़ने हेतु आगे आ सकते हैं।
  • यात्रा के संचालन को गति देने हेतु निर्धारित गतिविधियों में से एक या अधिक गतिविधियों के संचालन का दायित्व इन व्यक्तियों/संस्था/संस्थांनों द्वारा लिया जा सकता है।

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